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सार्वजनिक सेक्टर, केन्द्रीय एवं राज्य सरकार

1. परियोजना वित्त प्रकोष्ठ का संस्थापन

ऐसे समय में जबकि राज्यों के वित्तीय संसाधनों पर पहले से ही काफी दबाव है, ’अवसंरचनात्मक अन्तराल’ को भरने और विश्व स्तर की अवसंरचना विकसित करने के लिए संवर्द्धित पूंजीगत व्यय की जरूरत यह आवश्यक बना देती है कि नव-कल्पनाशील वित्तीय तौर-तरीकों को विकसित किया जाए और विभिन्न श्रेणियों के निवेशकों के साथ मिलकर काम किया जाए। आर्थिक आय की निम्न दर, उच्च सामाजिक मूल्यवत्ता अथवा आगे और अधिक निवेश आकर्षित करने वाली आधारभूत अवसंरचना होने जैसे विभिन्न कारणों से, जिन परियोजनाओं को PPP मोड के अंतर्गत शामिल नहीं किया जा सकता है उनके संदर्भ में यह और अधिक अनिवार्य हो जाता है।

IPL राज्य सरकारों को ’राज्य अवसंरचना विकास योजनाओं’ (State Infrastructure Development Plans - SIDP) की रूपरेखा तैयार करने में मदद देगा और एक समर्पित ’परियोजना वित्त प्रकोष्ठ’ (Project Finance Cell) के माध्यम से क्रियाशील होकर योजना के कार्यान्वयन तक उन्हें समर्थन देगा। इस तरह के प्रकोष्ठ निम्नांकित कार्यों के माध्यम से अपने क्लाइंटों को परियोजना तैयार करने की सम्पूर्ण प्रक्रिया में सहायता और समर्थन देते हैं:

  1. कार्यान्वयन के लिए निर्धारित परियोजनाओं का सुगठन और प्राथमिकीकरण
  2. PPP के लिए और राज्यों द्वारा विकास हेतु निर्भरता / उपयुक्तता के आधार पर SIDP के अंतर्गत परियोजनाओं का पृथक्कीकरण या श्रेणीकरण
  3. SIDP के क्रियान्वयन के उद्देश्य से मैक्रो फाइनेंशियल स्ट्रेटजी (वृहत वित्तीय रणनीति) तैयार करना
  4. कोष एकत्रित करने के नव-कल्पनाशील विकल्पों का प्रयोग करके ’रिसोर्स मोबिलाइजेशन टूलकिट’ तैयार करना
  5. संभावित निवेशकों के साथ सतत क्रियाशीलता बनाए रखने के लिए मार्केटिंग प्लान तैयार करना
  6. ’रिसोर्स मोबिलाइजेशन टूलकिट’ को कार्यान्वित करने के लिए प्रभावी मॉनिटरिंग और MIS सृजित करना

2. राज्य पीपीपी प्रकोष्ठ

अवसंरचनाओं के विकास के लिए वृहत वित्तीय जरूरतों को पूरा करने हेतु राज्य सरकारों के लिए आवश्यक हो जाता है कि वे राज्य के वित्त के अन्तराल को भरने के लिए प्राइवेट सेक्टर से भी पूंजी को क्रियाशील करें। प्राइवेट सेक्टर के साथ क्रियाशील होने और यह सुनिश्चित करने के लिए कि अत्यंत निचले स्तर की एजेन्सियों तक उत्तम कार्यप्रथाओं को प्रभावी रूप से अंतरित किया जा सके, राज्यों के लिए यह आवश्यक है कि वे एक सुदृढ़ पद्धति संस्थापित करने के लिए केन्द्रित प्रयास करें। राज्य PPP प्रकोष्ठ एक नोडल संस्था के रूप में काम करता है, वह अवसंरचना के क्षेत्र में निवेश के लिए एक लाभदायक वातावरण बनाने, मानक कार्यप्रथाएं तैयार करने और PPP अनुबंधों के प्रबंधन में निचले स्तर की एजेन्सियों की क्षमता विकसित करने में राज्य सरकार के प्रयासों को समन्वित करता है।

PPP प्रकोष्ठ एक उच्च-स्तरीय एजेन्सी की भूमिका निभाता है जो कि अवसंरचना परियोजनाओं को क्रियान्वित करने में परामर्श और सहायता देने में राज्य सरकार और विकास एजेन्सियों दोनों के लिए एक ’थिंक टैंक’ (विशेषज्ञों का निकाय) की तरह काम करता है।

PPP प्रकोष्ठों के संस्थापन और उनके प्रभावी प्रबंधन के कार्य में परामर्श और सहायता देने के लिए IPL राज्य सरकारों के साथ सक्रिय रहता है। PPP प्रकोष्ठ की मुख्य भूमिकाएं और दायित्व निम्नांकित होंगे:

  1. अवसंरचना विज़न दस्तावेज़ तैयार करना
  2. कार्य-परिचालन की योजना
  3. सभी अवसंरचना सेक्टरों में मानकीकृत प्रादर्श दस्तावेज़ तैयार करना
  4. कार्यान्वयन एजेन्सी द्वारा सौंपी गई परियोजनाओं का मूल्यांकन
  5. परियोजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी और रिपोर्टिंग

3. आस्तियों (ऍसेट्स) के जीवन चक्र लागत का मूल्यांकन

हमारे परामर्शदाताओं की टीम पूरे जीवन-चक्र के दौरान ऍसेट्स की लागत के मूल्यांकन, समझने, उसके मूल्यांकन और प्रादर्श (मॉडेल) तैयार करने में लोक प्राधिकारी को सहायता देती है। इससे ऍसेट्स विकसित करने के लिए विभिन्न वैकल्पिक तरीकों के मूल्यांकन करने और उस ऍसेट्स के विकास के लिए समुचित फेज़िंग तैयार करने में मदद मिलती है। इससे लागत का अधिकतम उपयोग और परियोजना से अधिकतम लाभ हासिल करने में मदद मिलती है।

4. परियोजना का मूल्यांकन और वित्तीय व्यवहार्यता

किसी भी अवसंरचना परियोजना की योजना बनाने की प्रक्रिया में उसकी वित्तीय व्यवहार्यता निर्धारित करना एक महत्वपूर्ण कदम होता है। क्रियान्वयन एजेन्सियों द्वारा अनेक योजनाएं बनाई गई हैं लेकिन या तो वे आरंभ ही नहीं हो सकीं या फिर कोष (फंड) के अभाव में निर्माण कार्य बीच में ही रोक दिया गया। वित्तीय व्यवहार्यता अध्ययन से क्रियान्वयन एजेन्सियों को आर्थिक रूप से स्थायित्वपूर्ण अवसंरचनात्मक योजनाएं बनाने में मदद मिलती है। इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट फाइनेंसिंग के क्षेत्र में अपनी गहन समझ के कारण IPL टीम एक विस्तृत प्रोजेक्ट मूल्यांकन प्रक्रिया संचालित करके और इस तरह वित्तीय रूप से व्यवहार्य प्रोजेक्टों को संरचित करके अपने क्लाइंटों को परियोजनाओं की भरोसेमंदी के बारे में सलाह देने में सक्षम होती है।

5. PPP के लिए परियोजना के स्थायित्व का संवर्द्धन

PPP आधार पर तैयार की जाने वाली परियोजनाओं की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि परियोजना को कितनी अच्छी तरह संरचित और परिभाषित किया गया है। हमारे सलाहकारों की टीम लोक अधिकारियों को परियोजना के कार्यपालन सम्बंधी आवश्यकताओं के मूल्यांकन, नियमन सम्बंधी तैयारियों, मार्केट की प्रचुरता, संसाधनों के समुचित उपयोग और जोखिम आवंटन, संगठनात्मक क्षमताएं विकसित करने और पर्याप्त स्रोत/संसाधन जुटाने की दृष्टि से प्रोजेक्ट को आकर्षक बनाने, इत्यादि में सहायता देती है। इससे यह भी सुनिश्चित होता है कि परियोजना अपने विकास के अगले चरण यानी किसी प्राइवेट कम्पनी द्वारा उसे संचालित किए जाने की बोली लगाने की प्रक्रिया के लिए तैयार है।

6.ट्रांजेक्शन एडवाइजरी और बिड प्रक्रिया प्रबंधन

IPL टीम एक पारदर्शी बिडिंग प्रक्रिया के संचालन में कार्यान्वयन एजेन्सियों को मदद देती है जिसमें पिच बुक्स (PIM, RFQ/RFP डॉक्युमेंट्स) की तैयारी, भागीदारी प्रोत्साहित करने के लिए संभावित निवेशकों के साथ अभिक्रिया तथा क्लाइंटों के कानूनी प्रकोष्ठ एवं कानून विशेषज्ञों से परामर्श करके कॉन्ट्रैक्ट दस्तावेज़ तैयार करना इत्यादि बातें शामिल हैं। इसके अलावा, IPL टीम स्विस चैलेंज मोड के अंतर्गत अ-याचित प्रस्ताव प्राप्त करने, प्राप्त प्रस्तावों के मूल्यांकन, मूल प्रस्तोता के साथ बातचीत की प्रक्रिया जारी रखते हुए उन्हें सहायता देने और अंतत: प्रोजेक्ट कार्य सौंपने तक काउंटर-बिड्स की स्वस्थ प्रक्रिया सुनिश्चित करने के कार्यों में भी एजेन्सियों को सहायता देती है।

7.  नीति और विनियम की रचना में सहायता

इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के बारे में अपनी गहरी जानकारी के परिणामस्वरूप, IPL वैश्विक आदर्श कार्य-प्रथाओं के आलोक में प्रस्तावित नीति और उसके विकल्पों का तुलनात्मक अध्ययन करके नियामक अधिकारियों को विभिन्न नीतियों और विनियमों के प्रभाव की व्याख्या करने में मदद देता है, हितधारकों के साथ बातचीत कि विकास प्रक्रिया में उपस्थित बाधाओं की कैसे पहचान की जाए और केन्द्रीय एवं स्थानीय नियामकों द्वारा सेक्टर का विकास सुनिश्चित कर सकने वाली नीतियां और विनियम कैसे तैयार की जाएं। ऐसे विभिन्न पब्लिक/प्राइवेट पार्टनरशिपों में जो कि अनिवार्यत: वैधानिक, राजनीतिक, विनियामक एवं वाणिज्यिक सीमान्तों पर क्रियाशील होते हैं, हम जोखिम की साझेदारी पर विनियमों द्वारा पड़ने वाले प्रभावों का भी विश्लेषण करते हैं।

हमारे द्वारा क्लाइंटों को प्रदान की जाने वाली सेवाओं में शामिल हैं:

  • कार्यनीतिक एवं नियामक योजना
  • नियामक एवं नीतिगत सुधार
  • प्रस्तावित विधान और विनियमन का विश्लेषण
  • पब्लिक-प्राइवेट पार्टनर्शिप को सक्षम बनाने के लिए नीतिगत संरचना
  • PPP टूलकिट/नीति तैयार करना
  • लोक वित्त (पब्लिक फाइनेंस) में नीति एवं विनियम की रचना